बिग न्यूज :- खटीमा अधिवक्ता एसोसियेशन: 2024-25 बजट आपत्तियों पर पांच सदस्यीय जांच कमेटी की रिपोर्ट, आय-व्यय लेखा-जोखा सही पाया गया

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2 सितंबर 2025 ( सीमांत की आवाज ) खटीमा अधिवक्ता एसोसियेशन के 2024-25 के बजट पर उठी आपत्तियों की जांच के लिए गठित पांच सदस्यीय कमेटी ने 02-09-2025 को अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की। कमेटी ने कार्यकारिणी द्वारा प्रस्तुत आय-व्यय लेखा-जोखा को सही पाया और आपत्तियों को आधारहीन करार दिया

 

खटीमा अधिवक्ता एसोसियेशन खटीमा के वर्ष 2024-25 के बजट पर प्रस्तुत की गयी आपत्ति पर पांच सदस्यीय कमेटी की जांच दिनांक-02-09-2025

दिनांक-30-08-2025 को खटीमा अधिवक्ता एसासियेशन खटीमा में कार्यकारिणी द्वारा आय व्यय प्रस्तुत किये जाने एवं चुनाव अधिकारी नियुक्त किये जाने के संबंध में आमसभा बुलाई गयी थी, जिसमें कार्यकारिणी द्वारा वर्ष 2024-25 का बजट प्रस्तुत किया गया, जिस बजट के आय-व्यय पर कुछ अधिवक्ताओं द्वारा श्रीमान अध्यक्ष / सचिव, खटीमा अधिवक्ता एसोसियेशन को छः विन्दुओं पर लिखित आपत्ति प्रस्तुत की गयी, जिसके साथ एक बजट की बेलेंस सीट आठ पेज की जिसमें विशेष आय 2882757/-रू० दर्शित की गयी, की फोटोप्रति संलग्न की गयी है।

सर्वसम्मति से उक्त आपत्ति प्रस्तुत होने के पश्चात आमसभा में आपत्ति के निस्तारण हेतु पाचं सदस्यों की एक कमेटी नियुक्त करने की चात कही गयी, जिसके पश्चात चुनाव अधिकारी एवं सहायक चुनाव अधिकारी नियुक्त किया गया। तत्पश्चात चुनाव अधिकारी व सहायक चुनाव अधिकारी द्वारा अध्यक्ष को जांच कमेटी नियुक्त करने हेतु कार्यवाही रजिस्टर में लिखा गया। तत्पश्चात अध्यक्ष श्री सूरज प्रकाश राणा द्वारा जांच समिति में सदस्य 1 हेमंत कुमार भट्ट, 2- हयात सिंह कुंवर, 3-विमलेश कुमार शर्मा, 4- सुनीता भट्ट, 5- पी०सी०पंत एडवोकेट्स को नियुक्त किया गया, जिसकी सूचना जांच समिति को दी गयी, जांच समिति द्वारा दिनांक-01-09-2025 को उक्त आदेश की फोटोप्रति प्राप्त कर जांच की कार्यवाही प्रारम्भ की गयी। कार्यकारिणी से उनके द्वारा प्रस्तुत की गयी बजट की फोटोप्रतिलिपि की गयी, एवं सदस्यों द्वारा दी आपत्ति तथा उसके साथ संलग्न विशेष आय की फोटो प्रति प्राप्त की।

इसके पश्चात दिनांक-01-09-2025 को गठित कमेटी द्वारा कार्यवाही आरम्भ की गयी। कार्यवाही के पश्चात आपत्तिकर्ताओं को आज दिनांक-02-09-2025 की तिथि की सूचना आपत्ति स्पष्टीकरण के लिए समय 11.00 बजे अपरान्ह प्रस्तुत आपत्ति के निस्तारण हेतु जारी किया गया, तथा नोटिस बोर्ड पर भी चस्पा किया गया। आज अब्दुल माजिद, एडवोकेट द्वारा अपनी आपत्ति के स्पष्टीकरण में लिखित दिया कि में आपत्ति के साथ संलग्न वेलेस सीट को व्यस्तता के कारण बिना देखे हस्ताक्षर कर दिये गये।

आज दिनांक-02-09-2025 को कमेटी के समस्त सदस्यगण 11.00 बजे अपरान्ह बार भवन में उपस्थित आये, तथा आपत्तिकर्तागणों का इंतजार करते रहे, तथा जांच कमेटी के बैठने का स्थान अध्यक्ष कार्यालय है, जिसमें कमेटी के सदस्यों के अलावा अन्य किसी भी व्यक्ति को साथ में नही विठाया गया, सिर्फ आपत्तिकर्ताओं का इंतजार करते रहे, समय लगभग 1.30 बजे बृजेश शर्मा, एडवोकेट व सचिन सिंह राना, एडवोकेट अपनी आपत्ति के निस्तारण के संबंध में लिखित स्पष्टीकरण दिया है कि 2882757/-रू0 के बजट (आय-व्यय) के बारे में प्रार्थि ने उस कागज का अवलोकन नही किया, तथा विजली के बिल के संबंध में आपत्ति की, उसके पश्चात श्री रामवचन, एडवोकेट ने अपनी आपत्ति में हस्ताक्षर के संबंध में कोई आपत्ति नही की गयी, सिर्फ बिजली के बिल के संबंध में आपत्ति की।

उक्त आपत्तिकर्ता के अतिरिक्त अन्य कोई आपत्तिकर्ता उपस्थित नही आये, और न ही उन्होंने अपना कोई लिखित स्पष्टीकरण दिया। अतः जांच कमेटी द्वारा आपस विचार विमर्श पर आय-व्यय के बजट पर आपत्ति के प्रत्येक पैरा पर अपना निम्न निष्कर्ष दिया जाता है-

1-आपत्ति के पैरा नं0-1 में यह कहा गया है कि बार की आय लगभग 22,00,000/-रू० दिखायी गयी है एवं व्यय 20,00,000/- रू० दिखाया गया है, जो समस्त सदस्यों की समझ से परे है। बार का जो बजट पेश किया गया है उसकी आय 2249014 तथा व्यय 2030429/- दिखाया गया है तथा शेष बचत 218585/-रू० दर्शित है।

2-आपत्ति के पैरा-2 में कहा गया है कि सन्-2024-25 में बार के पदाधिकारियो द्वारा वैलफेयर कमेटी का गठन नही किया गया, जो विधि विरूद्ध है, क्योंकि जब किसी अधिवक्ता को आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है तो उसका प्रार्थना पत्र अध्यक्ष द्वारा वैलफैयर कमेटी को रेफर किया जाता है और कमेटी अपनी रिपोर्ट लगाकर अध्यक्ष को दी जाती है, तब अध्यक्ष द्वारा लाभार्थी को सहायता प्रदान करती है।

आपत्ति के बिन्दु-2 पर जांच कमेटी द्वारा यह निष्कर्ष निकाला गया कि बार के पदाधिकारियों द्वारा सन्-2024-235 में वेलफेयर कमेटी का गठन नही किया गया, जिस कारण वेलफेयर कमेटी का गठन नही हुआ तो उन्हें रेफर करने का कोई प्रश्न उत्पन्न नही होता। लेकिन पदाधिकारियों द्वारा वेलफेयर फण्ड कई सदस्यों को दिया गया है, जो भी वेलफेयर फण्ड दिया गया है, बजट के अवलोकन से प्रतीत होता है कि धनराशि चैक द्वारा वितरित की गयी है, और बजट में चैक नम्बर दर्शाये गये है, लेकिन किसी सदस्य को कम या किसी को अधिक दिसे जाने के संबंध में कमेटी निर्णय नही ले सकती है।

3-आपत्ति के पैरा-3 में अन्य मदों में भारी भरकम व्यय दिखाये गये है, जिसका कोई बिल आमसभा में नही रखा गया है, इससे बार के सदस्यों में संदेह भरा हुआ है, इस संबंध में बार पदाधिकारियों से पूछा गया समस्त बिल बार में मौजूद है, और बिलों की धनराशि सही दर्शायी गयी है।

4-आपत्ति के पैरा-4 में कहा है कि बेलेन्स सीट की तीसरी सीट में कुल शुद्ध आय 2892797/-रू० दर्शायी गयी है. इस प्रकार कुल 2030429/-रू0 घटाकर 862328/-रू0 कुल बचत धनराशि दर्शायी जानी चाहिए, जबकि ऐसा न कर 6,00,000/-रू० का गवन प्रतीत होता है। इस आपत्ति के संबंध गठित कमेटी का यह मत है कि बजट बेलेन्स सीट दो प्रतियों में कार्यकारिणी द्वारा सदन के पास पेश की गयी थी, लेकिन आपत्तिकर्ताओं द्वारा अपनी आपत्ति के साथ जो बेलेन्स सीट पेश की है वह बेलेन्स सीट वास्तव में कार्यकारिणी द्वारा प्रस्तुत नही की गयी है। इसलिए आपत्तिकर्ताओं ने अपनी आपत्ति के साथ जो फोटो प्रति बेलेन्स सीट संलग्न है, उसे जांच कमेटी स्वीकार नही करती। क्योंकि वह कार्यकारिणी द्वारा प्रस्तुत बेलेन्स सीट का भाग नही है, जिस कारण आपत्तिकर्ताओं द्वारा प्रस्तुत बेलेन्स सीट संदिग्ध है।
5-आपत्ति के पैरा-5 में आपत्तिकर्ताओं द्वारा कहा गया है कि बिना संघ की नियमावली अनुसार अधिवक्ता कल्याणकारी टिकट जिसका रेट मात्र 50/-रू0 है, को 60/-रू0 में अवैध रूप से वेलेन्स सीट में दर्शाया गया है, और वास्तव में इसी 60/-रू० के रूप में मूलरूप से विकय किया गया है। इस संबंध में जांच कमेटी द्वारा जांच में पाया है कि कल्याणकारी टिकट का विकी 60/-रू० इसलिए की जाती है कि 50/-रू० कल्याणकारी टिकट को 60/-रू0 में जो बेचा जाता है, उसमें जो 10/-रू० ज्यादा लिया जाता है वह अतिरिक्त धनराशि बार फण्ड में जमा होती है।

दौराने विवेचना आपत्तिकर्ताओं ने अपने स्पष्टीकरण में कहा कि हमें बिजली के बिल के संबंध में लिखित आपत्ति दे रहे है, इस संबंध में उनकी आपत्ति के निस्तारण हेतु कार्यकारिणी के कोषाध्यक्ष से स्पष्टीकरण मांगा गया तो उनके द्वारा लिखित देकर कहा गया कि बिल का संग्रह पूल क्लर्क द्वारा किया जाता है, उसकी प्रतिमाह की सूची उनके पास है। बिजली का बिल कई सदस्यों द्वारा समय से नही दिया जाता है तब पूल क्लर्क द्वारा संग्रहण धनराशि में कमी होने पर शेष धनराशि का भुगतान संस्था से पूल क्लर्क लेकर बिजली का बिल जमा करता है। संस्था द्वारा दी गयी धनराशि बजट में व्यय के रूप में दर्शायी गयी है।

अतः जांच कमेटी अंतिम रूप से इस निष्कर्ष पर पहुंचती है कि उपरोक्त विवरण के आधार पर आपत्तिकर्ताओं की आपत्ति का निस्तारण करते हुये आपत्ति पर बल नही पाती है। कार्यकारिणी द्वारा प्रस्तुत बजट के अवलोकन के स्पष्ट है कि आय-व्यय का लेखा-जोखा सही है, जांच कमेटी अध्यक्ष द्वारा बनायी गयी है। उक्त कमेटी रिपोर्ट की प्रति अध्यक्ष खटीमा अधिवक्ता एसोसियेशन खटीमा को प्रेषित की जाती है तथा एक प्रति नोटिस बोर्ड पर चस्पा की जाती है।

 

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