24 सितम्बर 2025(सीमांत की आवाज ) रुद्रपुर के सरदार भगत सिंह डिग्री कॉलेज से एक ऐसी खबर आई है, जो हमारे शिक्षा व्यवस्था और छात्र राजनीति पर गहरे सवाल खड़े कर रही है। आज, 24 सितंबर 2025 को छात्र संघ चुनाव के नामांकन के दौरान कॉलेज गेट पर दो छात्र गुटों के बीच जमकर झड़प हो गई। मारपीट के बीच एक युवक ने तमंचे से फायरिंग कर दी! हां, आपने सही पढ़ा – कॉलेज के गेट पर गोली चल गई, और पूरा इलाका हड़कंप में आ गया।
सूचना मिलते ही पुलिस पहुंची और दोनों गुटों को तितर-बितर कर दिया। लेकिन सवाल ये है – क्या ये पहली बार हुआ है? बिल्कुल नहीं! महज 5 दिन पहले, 18 सितंबर को रुद्रपुर के बगवाड़ा इलाके में भी छात्र संघ चुनाव को लेकर फायरिंग हुई थी। वहां एक युवक के पैर में गोली लग गई, और कल ही पुलिस ने तीन आरोपियों को कोर्ट में पेश किया। दो घटनाएं, दो फायरिंग, और एक ही वजह – छात्र चुनाव! ये क्या हो रहा है हमारे कॉलेज कैंपस में? जहां ज्ञान का प्रकाश होना चाहिए, वहां हिंसा का अंधेरा क्यों छा रहा है?
उधम सिंह नगर जिले की एसपी क्राइम निहारिका तोमर ने बताया कि मामले की जांच चल रही है, और जल्द ही आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा। लेकिन दोस्तों, जांच तो हर बार होती है, गिरफ्तारी भी होती है, फिर ये सिलसिला क्यों रुक नहीं रहा? क्या लिंगदोह कमेटी के दिशा-निर्देशों का पालन हो रहा है? हाल ही में ही कॉलेज में चुनावी सुरक्षा पर बैठक हुई थी, जहां पारदर्शिता और अनुशासन पर जोर दिया गया। फिर भी, नामांकन के पहले ही दिन फायरिंग? ये पुलिस की कार्यशैली पर बड़ा सवालिया निशान है। क्या सुरक्षा इंतजाम सिर्फ कागजों पर हैं?
ये घटना सिर्फ रुद्रपुर तक सीमित नहीं। पूरे देश में छात्र संघ चुनाव हिंसा का शिकार हो रहे हैं। याद कीजिए पटना यूनिवर्सिटी का वो वोटिंग वाला बवाल, जहां बूथ पर फायरिंग हो गई। राजस्थान में तो छात्र संगठनों के प्रदर्शन के दौरान दर्जनों छात्रों को हिरासत में लेना पड़ा। हमारी युवा पीढ़ी, जो देश का भविष्य है, वो तो आपस में ही लड़ रही है। पैसे, पावर और राजनीतिक दबाव के चक्कर में। क्या यही है वो लोकतंत्र, जिसकी मिसाल छात्र चुनाव देने चाहिए?
मेरा मानना है कि अब समय आ गया है सख्त कदम उठाने का।
चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता लाएं: नामांकन से वोटिंग तक CCTV और सख्त निगरानी हो।
पुलिस की भूमिका मजबूत करें: सिर्फ जांच नहीं, रोकथाम पर फोकस।
छात्रों को जागरूक करें: हिंसा से कुछ हासिल नहीं होता, संवाद से सब कुछ।
दोस्तों, आप क्या सोचते हैं? क्या छात्र चुनावों पर पूर्ण प्रतिबंध लग जाना चाहिए, या सुधार से इसे बेहतर बनाया जा सकता है? अपनी राय कमेंट्स में जरूर शेयर करें। साथ ही, शेयर करके इस मुद्दे को आवाज दें – क्योंकि चुप्पी ही हिंसा को बढ़ावा देती है!








