5अप्रैल 2025 (सीमांत की आवाज )
खटीमा, उत्तराखंड में वन अग्नि को नियंत्रित करने के लिए लगाई गई नियोजित आग ने अनपेक्षित रूप से जंगलों में फैलकर पेड़ों को अपनी चपेट में ले लिया। यह घटना हाल ही में उस समय सामने आई जब वन विभाग ने जंगल में सूखी घास और पत्तियों को जलाकर आग को नियंत्रित करने की कोशिश की, ताकि बड़ी अनियंत्रित आग की घटनाओं को रोका जा सके। लेकिन तेज हवाओं और सूखे मौसम के कारण यह आग नियंत्रण से बाहर हो गई और आसपास के पेड़ों तक फैल गई।
स्थानीय सूत्रों के अनुसार, खटीमा के जंगलों में यह आग पिछले कुछ दिनों से फैल रही है, जिससे वन संपदा को काफी नुकसान पहुंचा है। वन विभाग की टीमें और अग्निशमन कर्मी आग पर काबू पाने के लिए दिन-रात जुटे हुए हैं। इस घटना में कई हेक्टेयर जंगल प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है, साथ ही वन्यजीवों के लिए भी खतरा बढ़ गया है।
वन विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि नियोजित आग (कंट्रोल्ड बर्निंग) एक सामान्य तकनीक है, जिसका उपयोग जंगल की आग को रोकने के लिए किया जाता है, लेकिन मौसम की परिस्थितियों ने इसे जटिल बना दिया। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस आग से धुआं क्षेत्र में फैल गया है, जिससे सांस लेने में दिक्कत और पर्यावरण को नुकसान हो रहा है।
फिलहाल, आग को बुझाने के लिए अतिरिक्त संसाधनों की मांग की गई है, और प्रशासन ने लोगों से जंगल के पास न जाने की अपील की है। इस घटना ने वन अग्नि प्रबंधन की रणनीतियों पर सवाल खड़े किए हैं, और विशेषज्ञों का मानना है कि बदलते मौसम और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को ध्यान में रखकर नई योजनाएं बनानी होंगी।