25 अगस्त 2025 ( सीमांत की आवाज ) संवाददाता असद जावेद
खटीमा में अवैध भैंस वध का काला कारोबार थमने का नाम नहीं ले रहा। गोटिया से इस्लामनगर तक घरों में चोरी-छिपे मीट काटा जा रहा है, और अब यह कारोबार खुलेआम दुकानों तक पहुंच गया है। सूत्रों के अनुसार, प्रशासन और नगरपालिका की कथित मिलीभगत के चलते यह अवैध धंधा फल-फूल रहा है। इसके साथ ही, जानवरों की हड्डी और खाल का कारोबार भी जोरों पर है, जिसमें आधा दर्जन लोग चोरी-छिपे शामिल हैं। स्थानीय लोगों ने प्रशासन की निष्क्रियता पर सवाल उठाए हैं, मांग की जा रही है कि इस काले कारोबार पर सख्त कार्रवाई हो।
नगर में अवैध भैंस वध और मांस के काले कारोबार को लेकर हाल के समाचारों और उपलब्ध जानकारी के आधार पर स्थिति गंभीर प्रतीत होती है। गोटिया से इस्लामनगर तक अवैध मांस बिक्री और पशु वध की खबरें सामने आई हैं, जिसमें प्रशासन और नगरपालिका की कथित मिलीभगत के आरोप भी लग रहे हैं।
1-अवैध मांस बिक्री और स्लॉटर हाउस की स्थिति:
खटीमा में 2018 से नगरपालिका का स्लॉटर हाउस राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) के मानकों को पूरा न करने के कारण बंद है। इसके बावजूद, गोटिया और इस्लामनगर क्षेत्र में चोरी-छिपे घरों और दुकानों में अवैध रूप से भैंस वध और मांस बिक्री का कारोबार चल रहा है। कुछ समाचारों के अनुसार, नगरपालिका और पुलिस ने इस्लामनगर गोटिया में अवैध मांस बिक्री के खिलाफ छापेमारी की, जिसमें दुकानें सीज की गईं।
2- प्रशासन की कार्रवाई:
अगस्त 2024 में, खटीमा नगरपालिका प्रशासन ने अवैध मांस बिक्री के खिलाफ सख्ती दिखाते हुए छापेमारी की और कुछ दुकानों को सीज किया। यह कार्रवाई स्थानीय लोगों की शिकायतों और मुखबिरों की सूचना के आधार पर की गई। हालांकि, आरोप है कि प्रशासन और नगरपालिका की मिलीभगत के कारण यह कारोबार खुलेआम चल रहा है।
3- हड्डी और खाल का अवैध कारोबार:
खटीमा और आसपास के क्षेत्रों में अवैध भैंस वध के साथ-साथ जानवरों की हड्डी और खाल का कारोबार भी फल-फूल रहा है। समाचारों में इस बात का उल्लेख नहीं है कि इस कारोबार में शामिल लोगों के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई हुई हो। यह कारोबार चोरी-छिपे आधा दर्जन लोगों द्वारा संचालित हो रहा है, जैसा कि आपने बताया। हालांकि, इस विशिष्ट बिंदु पर हाल की खबरों में विस्तृत जानकारी उपलब्ध नहीं है।
4- प्रशासन और पुलिस पर मिलीभगत के आरोप:
स्थानीय लोगों और कुछ समाचारों में यह आरोप लगाया गया है कि पुलिस और नगरपालिका की निष्क्रियता या मिलीभगत के कारण यह अवैध कारोबार बेरोकटोक चल रहा है। उदाहरण के लिए, बांदा जिले के फतेहगंज में पशु तस्करी के मामले में पुलिस की भूमिका पर सवाल उठे हैं, जहां तस्कर पुलिस की मौजूदगी में भी भागने में सफल रहे। हालांकि यह खटीमा से संबंधित नहीं है, लेकिन यह अवैध पशु कारोबार और प्रशासनिक लापरवाही के व्यापक मुद्दे को दर्शाता है।
5- हाल की अन्य घटनाएं:
मुरादाबाद के भोजपुर में अगस्त 2025 में पुलिस ने 190 किलो अवैध भैंस मांस, काटने के उपकरण और इलेक्ट्रॉनिक कांटा जब्त किया। दो लोगों, शकील और नईम, के खिलाफ पशु क्रूरता अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज किया गया।
हरिद्वार के ज्वालापुर में भी एक दुकान में अवैध भैंस वध का मामला सामने आया, जहां पुलिस ने कार्रवाई की।
बरेली में मोहर्रम से पहले अवैध मांस तस्करी का भंडाफोड़ हुआ, जिसमें चार क्विंटल मांस बरामद किया गया।
6- निष्कर्ष और सुझाव:
खटीमा में अवैध भैंस वध और मांस, हड्डी, खाल के कारोबार पर अंकुश लगाने के लिए प्रशासन को और सख्त कदम उठाने की जरूरत है। स्थानीय लोगों के आरोपों को गंभीरता से लेते हुए निम्नलिखित कदम उठाए जा सकते हैं:
नियमित छापेमारी और निगरानी: अवैध स्लॉटर हाउस और दुकानों पर नियमित जांच और सीसीटीवी निगरानी की व्यवस्था।
7- पारदर्शी जांच: प्रशासन और पुलिस पर मिलीभगत के आरोपों की स्वतंत्र जांच।
कानूनी कार्रवाई: अवैध कारोबार में शामिल लोगों के खिलाफ पशु क्रूरता अधिनियम और अन्य प्रासंगिक कानूनों के तहत सख्त कार्रवाई।
जागरूकता अभियान: स्थानीय समुदाय को अवैध कारोबार के दुष्परिणामों के बारे में जागरूक करना।
हालांकि, विशिष्ट रूप से हड्डी और खाल के कारोबार पर हाल की खबरों में सीमित जानकारी उपलब्ध है। इस मुद्दे पर और ठोस कार्रवाई के लिए स्थानीय प्रशासन और पुलिस से संपर्क करके या RTI के माध्यम से जानकारी मांगी जा सकती है।








