3 सितंबर 2025( सीमांत की आवाज)
खटीमा में टनकपुर रोड पर खटीमा बस स्टेशन के आसपास हर शाम खटीमा-दिल्ली मार्ग पर चलने वाली प्राइवेट बसें नेशनल हाईवे पर अवैध रूप से सवारी भरने के लिए जाम की स्थिति पैदा कर रही हैं। ये डग्गामार बसें सड़क पर अनियंत्रित तरीके से खड़ी होकर यात्रियों को चढ़ाने-उतारने का काम करती हैं, जिससे न केवल यातायात बाधित होता है, बल्कि सड़क दुर्घटनाओं का खतरा भी बढ़ जाता है। स्थानीय लोगों और यात्रियों का कहना है कि इन बसों की लापरवाही और तेज रफ्तार के कारण आए दिन हादसे हो रहे हैं।
हाल के वर्षों में खटीमा में सड़क दुर्घटनाओं का ग्राफ बढ़ा है। उदाहरण के लिए, 2023 में सितारगंज रोड पर रोडवेज बस की टक्कर से एक बाइक सवार की मौत हो गई थी। इसी तरह, 2025 में एक निजी स्कूल बस की चपेट में आने से डेढ़ वर्षीय बच्चे की दर्दनाक मौत हुई। ये घटनाएं सड़क सुरक्षा के प्रति लापरवाही और अवैध बस संचालन की गंभीरता को दर्शाती हैं।
इसके अलावा, इन अवैध प्राइवेट बसों के संचालन से उत्तराखंड सरकार को राजस्व का भारी नुकसान हो रहा है। समस्तीपुर जैसे अन्य क्षेत्रों में भी अवैध ऑटो स्टैंडों से सरकारी राजस्व को नुकसान की बात सामने आई है, और खटीमा में भी यही स्थिति देखने को मिल रही है। इन बसों का संचालन बिना उचित परमिट और नियमों के पालन के हो रहा है, जिससे न केवल सरकारी खजाने को नुकसान हो रहा है, बल्कि यात्रियों की सुरक्षा भी खतरे में पड़ रही है।
स्थानीय प्रशासन और परिवहन विभाग को इस समस्या पर तत्काल कार्रवाई करने की आवश्यकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि नियमित चेकिंग, गति सीमा का कड़ाई से पालन, और अवैध बस स्टैंडों पर रोक लगाने से इस समस्या पर काबू पाया जा सकता है। साथ ही, बस स्टेशन के आसपास यातायात प्रबंधन को बेहतर करने और वैध बस संचालन को बढ़ावा देने की जरूरत है ताकि जाम और दुर्घटनाओं को रोका जा सके।
सुझाव:
1-परिवहन विभाग को अवैध बसों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करनी चाहिए और नियमित चेकिंग अभियान चलाना चाहिए।
2-खटीमा बस स्टेशन पर उचित पार्किंग और यातायात प्रबंधन की व्यवस्था की जाए।
3-यात्रियों की सुरक्षा के लिए बस चालकों के लिए प्रशिक्षण और गति नियंत्रण उपकरणों का उपयोग अनिवार्य किया जाए।
4-अवैध बस संचालन पर रोक लगाकर सरकारी राजस्व की हानि को कम किया जाए।








