4 जनवरी 2026 ( सीमांत की आवाज )
जलभराव का खतरा
खटीमा | विशेष रिपोर्ट
खटीमा नगर में सरकारी संपत्तियों पर अवैध कब्ज़े का खेल खुलेआम चल रहा है, लेकिन जिम्मेदार विभाग गहरी कुंभकर्णी नींद में सोया हुआ नजर आ रहा है। सड़क किनारे बने सरकारी नालों और बड़ी पुलियों को तोड़कर उन्हें खत्म किया जा रहा है, ताकि जमीन का रेट और साइज बढ़ाकर अवैध प्लॉटिंग, मकान और दुकानों का निर्माण किया जा सके।
नगर में सक्रिय प्रॉपर्टी डीलरों द्वारा बिना किसी जांच-पड़ताल के जमीनों की खरीद-फरोख्त जारी है। इसका नतीजा यह है कि पानी की निकासी के लिए बनाए गए सरकारी बड़े नाले और पुलियां धीरे-धीरे नक्शे से गायब होती जा रही हैं। स्थानीय प्रशासन और संबंधित विभाग आंखें मूंदे बैठे हैं।
टनकपुर रोड बना सबसे बड़ा उदाहरण
टनकपुर रोड पर होटल आफ्टरनून बार के सामने हाइवे किनारे बनी एक सरकारी पुलिया को पूरी तरह तोड़ दिया गया। जमीन का साइज और कीमत बढ़ाने के मकसद से पुलिया का अस्तित्व ही खत्म कर दिया गया। हैरानी की बात यह है कि तोड़ी गई पुलिया का मलवा आज भी मौके पर पड़ा है, जो इस अवैध कार्रवाई का जिंदा सबूत है, लेकिन विभाग अब भी “अनजान” बना हुआ है।
सैकड़ों नालों पर अवैध कब्ज़ा
स्थानीय लोगों का कहना है कि खटीमा क्षेत्र में इस तरह सैकड़ों सरकारी नालों और पुलियों को तोड़कर अवैध कब्ज़ा किया जा चुका है। नालों के बंद होने से भविष्य में जलभराव, सड़क धंसने और दुर्घटनाओं का खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है।
प्रशासनिक चुप्पी पर सवाल
सबूत सामने होने के बावजूद कार्रवाई न होना प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है। यदि समय रहते इन अवैध कब्ज़ों पर रोक नहीं लगाई गई, तो आने वाले दिनों में खटीमा नगर को भारी नुकसान झेलना पड़ सकता है।
अब देखने वाली बात यह होगी कि जिम्मेदार विभाग कब नींद से जागता है और सरकारी संपत्ति को बचाने के लिए ठोस कदम उठाता है, या फिर यूं ही सरकारी नाले और पुलियां अवैध कब्ज़ों की भेंट चढ़ती रहेंगी।








