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बिग न्यूज :- खटीमा में सरकारी जमीन की अवैध बिक्री: 15 साल बाद भी आरोपी बेखौफ, कार्रवाई के नाम पर खामोशी!”

16 मई 2025 ( सीमांत की आवाज ) 

यह समाचार एक गंभीर मुद्दे को उजागर करता है। जनपद उधम सिंह नगर के खटीमा में 2010 में सरकारी भूमि को निजी संपत्ति बताकर बेच दिया गया था, और अब तक (मई 2025 तक) बेचने वाले व्यक्ति पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है। सूत्र द्वारा दिए गए दस्तावेज में एक ₹50 का नॉन-ज्यूडिशियल स्टांप पेपर दिख रहा है, जिसमें हिंदी में बिक्रीनामा लिखा है। दस्तावेज में “उत्तरांचल” (अब उत्तराखंड) का उल्लेख है, और तारीख 31.03.2010 दी गई है। इसमें दो हस्ताक्षरकर्ताओं के नाम—कमलजीत सिंह और विनोद कुमार—भी दिख रहे हैं।

जिस स्टाम्प पर बिक्री की सरकारी जमीन का स्टाम्प

स्टाम्प पेपर पर खटीमा वार्ड 6 के निवासी दिनेश चंद्र कुकरेती द्वारा ग्राम पकड़िया में सरकारी अभिलेखों में दर्ज के अनुसार 355/1 खेत नंबर जो कि सरकारी भूमि है जिसको भूमिधरी बताकर ग्राम सैंजना के निवासी महेश जोशी को अठारह लाख में 2010 मार्च के माह में बिक्री किया गया है । उसके बावजूद भी आजतक बिक्री करने वाले व्यक्ति पर कोई कार्यवाही नहीं की गई मामला तब सामने आया जब उसी सरकारी भूमि के पास 355/4 जनजाति समुदाय के व्यक्ति सुदेश राणा  की भूमि को भी अपना बताकर प्रशासन को गुमराह करने का काम सामने आया जबकि 2010 में सरकारी जमीन बेचने वाले आरोपी शिकायत स्थानीय प्रशासन समेत जिला प्रशासन से की गई है। उससे पहले खटीमा न्यायालय व जिला न्यायालय से भी जनजाति समुदाय के सुदेश राणा के पक्ष में उसकी भूमि पर घोषणा कर आदेश पारित किया गया है।

तहसील से प्राप्त जमीन का नक्शा

न्यायालय से हुए आदेश

पीड़ित जनजाति समुदाय द्वारा जनजाति आयोग में की गई शिकायत पत्र

जनपद उधम सिंह नगर के जिलाधिकारी से की गई शिकायत पत्र

सूत्रों के अनुसार, 2010 में खटीमा, उधम सिंह नगर में सरकारी भूमि को एक व्यक्ति ने अपनी निजी संपत्ति बताकर बेच दिया। बिक्रीनामा ₹50 के स्टांप पेपर पर दर्ज है, जिसमें जमीन का विवरण और हस्ताक्षर मौजूद हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि इस धोखाधड़ी में प्रशासन की मिलीभगत हो सकती है, क्योंकि 15 साल बीतने के बावजूद आरोपी के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई। क्या अब जागेगा प्रशासन, या यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा?

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