11 नवंबर 2025 (सीमांत की आवाज )
जनपद उधम सिंह नगर के सीमांत क्षेत्र खटीमा के सुरई वन क्षेत्र अंतर्गत उत्तर प्रदेश–उत्तराखंड सीमा पर स्थित एशिया का सबसे बड़ा 22 किलोमीटर लंबा कच्चा डैम ‘शारदा सागर’ एक बार फिर प्रवासी पक्षियों की चहचहाहट से गुलजार होने लगा है। सर्दियों के मौसम में यहां साइबेरियन पक्षियों समेत दर्जनों दुर्लभ प्रजातियों के विदेशी परिंदे हजारों किलोमीटर दूर से उड़कर पहुंचते हैं।
इन विदेशी मेहमानों के आगमन के साथ ही उनके अवैध शिकार का खतरा भी बढ़ जाता है। इसे देखते हुए वन विभाग ने उच्च अधिकारियों के निर्देश पर पहली बार स्टीमर नाव से जलाशय में नियमित गश्त की शुरुआत कर दी है। विभागीय टीम ने बताया कि यह पहल प्रवासी पक्षियों की सुरक्षा और शिकार रोकने के लिए एक बड़ा कदम है।
स्थानीय पर्यावरण प्रेमी वरिष्ठ पत्रकार असद जावेद ने बताया कि बीते वर्षों में कुछ असामाजिक तत्वों द्वारा जलाशय क्षेत्र में प्रवासी पक्षियों का शिकार किया जाता रहा है। उन्होंने कहा कि वन विभाग की यह मुहिम सराहनीय है और इससे न केवल पक्षियों की सुरक्षा होगी बल्कि स्थानीय जैवविविधता भी संरक्षित रहेगी।
इस मौके पर सुरई वन क्षेत्र के डिप्टी रेंजर सुंदरलाल वर्मा ने बताया कि विभाग को पहली बार जलाशय में गश्त के लिए स्टीमर नाव उपलब्ध कराई गई है। उन्होंने कहा, “हमारी टीमें जलाशय में चौबीसों घंटे निगरानी रखेंगी। किसी भी प्रकार के शिकार या अवैध गतिविधि में शामिल लोगों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।”
उन्होंने बताया कि गश्त के दौरान वन बीट अधिकारी रविन्द्र कुमार, वाचर योगेश कुमार, राजन चौहान, राजू सिंह और संतोष कुमार मौजूद रहे। टीम ने शारदा सागर क्षेत्र में गश्त कर प्रवासी पक्षियों के ठिकानों का निरीक्षण किया और स्थानीय लोगों से पक्षियों की सुरक्षा को लेकर सतर्कता बरतने की अपील की।
शारदा सागर में हर साल सर्दियों के दौरान हजारों की संख्या में साइबेरियन, ब्राह्मणी, ग्रेलेग गूज, कॉर्मोरेंट, और टील जैसी विदेशी प्रजातियों के पक्षी आते हैं। उनकी मधुर आवाज और झुंडों का दृश्य इस क्षेत्र को पक्षी प्रेमियों के लिए स्वर्ग बना देता है।
👉 वन विभाग की यह पहल न केवल जैवविविधता की रक्षा का प्रयास है, बल्कि यह संदेश भी देती है कि प्राकृतिक धरोहरों की सुरक्षा सबकी सामूहिक जिम्मेदारी है।
संपादक सुरेन्द्र कुमार गुप्ता








