Big news :पीलीभीत टाइगर रिजर्व में अवैध निर्माण

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23 अगस्त 2025 ( सीमांत की आवाज ) 

उत्तर प्रदेश के पीलीभीत जिले में स्थित महोफ वन क्षेत्र, जो पीलीभीत टाइगर रिजर्व का हिस्सा है, में अवैध अतिक्रमण और रिसॉर्ट निर्माण की शिकायत एक गंभीर मुद्दा है। अतिक्रमण पर, उसके अनुसार माधोटांडा इलाके के पास चुका चौकी के निकट वन भूमि पर लाखों रुपये की लागत से रिसॉर्ट बनाया जा रहा है, और वन विभाग की कथित मिलीभगत या उदासीनता के कारण यह धड़ल्ले से जारी है। यह टाइगर रिजर्व के आरक्षित क्षेत्र में पर्यावरणीय नियमों का उल्लंघन हो सकता है, क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने 2023 में टाइगर रिजर्व, नेशनल पार्क और वाइल्डलाइफ सैंक्चुअरी के कोर एरिया में किसी भी निर्माण पर प्रतिबंध लगाया है।

 निष्कर्ष हैं:
सामान्य स्थिति टाइगर रिजर्व में अवैध निर्माण की:
भारत भर में टाइगर रिजर्व और नेशनल पार्क के बफर जोन में 400 से अधिक अवैध संरचनाएं और रिसॉर्ट्स सक्रिय हैं। ये अतिक्रमण वन्यजीव संरक्षण को खतरा पैदा करते हैं और भारतीय वन अधिनियम की धारा 26 के तहत अपराध माने जाते हैं।
पीलीभीत टाइगर रिजर्व (PTR) में ईको-सेंसिटिव जोन (ESZ) की सीमाएं अप्रैल 2025 में उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के वन अधिकारियों द्वारा अंतिम रूप दी गईं, जिसके तहत 10 किमी के दायरे में पक्के निर्माण पर रोक है। महोफ रेंज, जहां यह घटना बताई गई है, रिजर्व का एक प्रमुख हिस्सा है और यहां वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए सख्त नियम हैं।
अन्य टाइगर रिजर्वों में भी समान समस्याएं सामने आई हैं, जैसे मुदुमलाई टाइगर रिजर्व में 821 अवैध भवन (रिसॉर्ट्स सहित) की पहचान, या कॉर्बेट टाइगर रिजर्व में अवैध निर्माण और पेड़ कटाई।
इस विशिष्ट घटना पर जानकारी:
मेरी खोज में महोफ वन क्षेत्र के चुका चौकी के पास किसी विशिष्ट अवैध रिसॉर्ट निर्माण की हालिया खबर मिली एवं नजर भी पड़ी हालांकि, पीलीभीत टाइगर रिजर्व में पर्यटन बढ़ रहा है, और जून 2025 में रिजर्व को 6 महीने के लिए बंद किया गया था, जिसमें महोफ क्षेत्र भी शामिल है। इससे पहले, रिजर्व में ड्रोन उड़ाने जैसी अनधिकृत गतिविधियों पर जांच हुई है।

एक्स पर संबंधित पोस्ट्स में अन्य क्षेत्रों (जैसे पुलिकट सैंक्चुअरी या चकराता) में अवैध रिसॉर्ट्स के बारे में चर्चा है, जहां अधिकारियों ने कार्रवाई की है, जैसे निर्माण रोकना या ध्वस्त करना लेकिन पीलीभीत के इस मामले पर कोई सार्वजनिक पोस्ट नहीं मिला, जो संकेत देता है कि यह या तो नया है या अभी मीडिया में नहीं आया।
महोफ क्षेत्र में पहले शिकार और मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाएं रिपोर्ट हुई हैं, जैसे 2024 में एक किसान पर बाघ का हमला। ऐसे में अतिक्रमण वन्यजीवों के लिए खतरा बढ़ा सकता है।
क्या किया जा सकता है:

रिपोर्ट इस पर भेजी जा सकती है कार्यवाही नहीं होने पर 

वन विभाग, नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी (NTCA) या स्थानीय प्रशासन को शिकायत दर्ज करें। NTCA की वेबसाइट (ntca.gov.in) पर शिकायत पोर्टल उपलब्ध है।


कानूनी पहलू: ईको-सेंसिटिव जोन में निर्माण के लिए पर्यावरण मंत्रालय की मंजूरी जरूरी है। यदि विभाग शामिल है, तो RTI या कोर्ट में याचिका दाखिल की जा सकती है।
जागरूकता: सोशल मीडिया पर पोस्ट करें या स्थानीय मीडिया से संपर्क करें। पीलीभीत टाइगर रिजर्व पर्यटन के लिए प्रसिद्ध है, और ऐसे मुद्दे संरक्षण को प्रभावित करते हैं।

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