30 अगस्त 2026 ( सीमांत की आवाज ) खटीमा। भारत-नेपाल सीमा से सटे खटीमा क्षेत्र में पहाड़ी लोक संस्कृति और परंपराओं को जीवंत रखने की अनूठी पहल की गई। जिला पंचायत सदस्य एवं आस्मिक एकेडमी की प्रबंधक रीता पांडेय कफलिया के नेतृत्व में क्षेत्र की पर्वतीय महिलाओं के साथ झोड़ा-चांचरी खेल महोत्सव का आयोजन किया गया। महोत्सव में सैकड़ों पर्वतीय महिलाओं ने उत्साहपूर्वक प्रतिभाग किया।
कार्यक्रम में लोक संस्कृति, लोक नृत्य और लोक संगीत की झलक देखने को मिली। महिलाओं के बीच विभिन्न प्रतियोगिताएं भी आयोजित की गईं, जिसमें प्रतिभागियों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। पारंपरिक वेशभूषा में पहुंची महिलाओं ने झोड़ा-चांचरी की प्रस्तुतियों के माध्यम से अपनी संस्कृति की खूबसूरत तस्वीर पेश की।
महिलाओं ने कहा कि खटीमा क्षेत्र में पहली बार इस तरह का झोड़ा-चांचरी खेल महोत्सव आयोजित किया गया है। वर्तमान समय में युवा पीढ़ी और खासकर बच्चे अपनी पारंपरिक संस्कृति से दूर होते जा रहे हैं। ऐसे आयोजनों के माध्यम से बच्चों को अपनी लोक परंपराओं, रीति-रिवाजों और सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।
आयोजकों ने कहा कि अगले वर्ष से महोत्सव में बच्चों को भी शामिल किया जाएगा, ताकि नई पीढ़ी पहाड़ी लोक संस्कृति को करीब से समझे और इसे आगे बढ़ाने में अपनी भूमिका निभाए। महिलाओं ने आयोजन की सराहना करते हुए इसे संस्कृति संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताया।
महोत्सव में महिलाओं का उत्साह देखते ही बना और पूरा माहौल झोड़ा-चांचरी की पारंपरिक धुनों से गूंज उठा।






























