बिग न्यूज :- राइस मिलर्स एसोसिएशन ने बकाया भुगतान को लेकर सरकार को दिया ज्ञापन, मांगें पूरी नहीं हुईं तो नई सीजन में खरीद से इनकार

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07 सितम्बर 2026 ( सीमांत की आवाज )

खटीमा में एसडीएम के माध्यम से सरकार को सौंपा जाएगा ज्ञापन, 2019 से 2025 तक करीब 500 करोड़ रुपये के भुगतान का मामला

खटीमा। उत्तराखंड राइस मिलर्स एसोसिएशन ने सरकार से लंबित भुगतान समेत विभिन्न मांगों के शीघ्र निस्तारण की मांग की है। एसोसिएशन की ओर से प्रदेशभर की तहसीलों में प्रशासन के माध्यम से सरकार को ज्ञापन सौंपने का निर्णय लिया गया है। इसी क्रम में खटीमा राइस मिलर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष ईश्वर बंसल के नेतृत्व में सोमवार को सुबह 11 बजे तहसील में एसडीएम के माध्यम से सरकार को ज्ञापन सौंपा जाएगा।


एसोसिएशन का कहना है कि राइस मिलर्स लंबे समय से अपनी समस्याओं को लेकर सरकार और विभागीय अधिकारियों को अवगत कराते आ रहे हैं, लेकिन अभी तक अपेक्षित समाधान नहीं हुआ है। संगठन ने स्पष्ट किया है कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती, तब तक आगामी 2026-27 धान खरीद सीजन में कच्चा धान खरीदना संभव नहीं होगा।
एसोसिएशन के अनुसार वर्ष 2019 से 2025 तक राइस मिलर्स का लगभग 500 करोड़ रुपये का भुगतान अभी भी लंबित है। मिलर्स ने सरकार से इस राशि का जल्द भुगतान किए जाने की मांग की है, ताकि बैंक ऋण और अन्य आर्थिक दायित्वों से राहत मिल सके।
इसके अलावा वर्ष 2025-26 का लगभग 6 लाख क्विंटल चावल उत्तर के लिए लंबित बताया गया है। एसोसिएशन ने इसकी प्रक्रिया पूरी होने और भुगतान मिलने की निश्चित समय-सीमा निर्धारित करने की मांग की है।
ज्ञापन में यह भी मांग की गई है कि आगामी धान खरीद सत्र 2026-27 में किसानों को धान का जिस प्रकार भुगतान किया जाता है, उसी प्रकार मंडी शुल्क का भुगतान भी सरकार द्वारा किया जाए। साथ ही वर्ष 2025-26 में मिलर्स द्वारा दिए गए 0.5 प्रतिशत विकास सेस की राशि वापस करने की मांग उठाई गई है।
राइस मिलर्स ने कस्टम मिलिंग चार्ज बढ़ाने की भी मांग की है। एसोसिएशन का कहना है कि पिछले 12 वर्षों से कस्टम मिलिंग चार्ज मात्र 10 रुपये प्रति क्विंटल है, जबकि इस अवधि में बिजली, श्रम, रख-रखाव और आधुनिकीकरण की लागत में काफी वृद्धि हुई है। ऐसे में कस्टम मिलिंग प्रोत्साहन राशि को बढ़ाकर 80 रुपये प्रति क्विंटल किए जाने की मांग की गई है।
खटीमा राइस मिलर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष ईश्वर बंसल ने कहा कि मिलर्स सरकार का सहयोग करते हुए धान और चावल की खरीद-प्रसंस्करण व्यवस्था में अपनी भूमिका निभाते हैं, लेकिन लंबे समय से भुगतान लंबित होने के कारण मिलर्स गंभीर आर्थिक संकट से गुजर रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार उनकी मांगों पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय ले, ताकि आगामी सीजन में व्यवस्था सुचारु रूप से चल सके।
एसोसिएशन के महामंत्री विजय अग्रवाल और कोषाध्यक्ष रिदम अग्रवाल सहित अन्य पदाधिकारी भी ज्ञापन कार्यक्रम में मौजूद रहेंगे। संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते उनकी मांगों का समाधान नहीं किया गया तो राइस मिलर्स आंदोलन का रास्ता अपनाने के लिए मजबूर होंगे।

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