बिग न्यूज : प्रधानमंत्री मोदी का पहाड़ी अंदाज, रजत जयंती समारोह में उत्तराखंड से गहरा जुड़ाव

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9 नवंबर 2025 ( सीमांत की आवाज )

पहाड़ी बोली, पहाड़ी टोपी — पीएम मोदी का हर अंदाज उत्तराखंडी रंग में रंगा

देहरादून।
उत्तराखंड राज्य स्थापना की रजत जयंती के मुख्य समारोह में रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पूरी तरह पहाड़ी रंग में नजर आए। सिर पर पारंपरिक पहाड़ी टोपी और भाषण में गढ़वाली-कुमाऊँनी बोली का मेल देखकर जनसमूह उत्साह से झूम उठा। प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में जितनी बार और जितनी गहराई से पहाड़ी भाषा का प्रयोग किया, ऐसा पहले कभी नहीं देखा गया था।

अपने भाषण की शुरुआत करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा — “देवभूमि उत्तराखंड का मेरा भै बंधु, दीदी, भुलियों, दाना सयानो, आप सबू तई म्यारू नमस्कार। पैलाग, सैंवा सौंली।”
उनके इन शब्दों ने पूरे पंडाल में जोश और आत्मीयता का संचार कर दिया।

भाषण के दौरान प्रधानमंत्री ने एक बार फिर गढ़वाली में कहा — “पैली पहाडू कू चढ़ाई, विकास की बाट कैल रोक दी छै। अब वखि बटि नई बाट खुलण लग ली।”
इस पर जनता ने तालियों की गड़गड़ाहट से उनका स्वागत किया।

प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में उत्तराखंड की संस्कृति, परंपरा और लोक पर्वों का विशेष रूप से उल्लेख किया। उन्होंने हरेला, फुलदेई, भिटोली, नंदा देवी, जौलजीबी, देवीधुरा मेले के साथ-साथ दयारा बुग्याल के बटर फेस्टिवल का भी जिक्र किया।

उनका यह पहाड़ी अंदाज न केवल लोगों के दिलों को छू गया, बल्कि इस रजत जयंती समारोह को उत्तराखंड की अस्मिता और संस्कृति से गहरे जुड़ाव का प्रतीक बना गया।

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