17 सितम्बर 2026 ( सीमांत की आवाज )
सीएम धामी ने 7.52 करोड़ की लागत से विकसित 170 मीटर लंबे स्नान घाट का किया लोकार्पण
देहरादून। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिवस के अवसर पर हरिपुर कालसी स्थित मां यमुना का तट आस्था, संस्कृति और विकास के संगम का साक्षी बना। यहां आयोजित ‘आशीर्वाद का दीया’ कार्यक्रम में 2100 दीपों से यमुना तट जगमगा उठा। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने साधु-संतों, श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों के साथ मां यमुना की आरती में प्रतिभाग किया।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने मां यमुना की प्रतिमा का अनावरण करने के साथ हरिघाट का लोकार्पण किया। साथ ही मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) की ओर से 7.52 करोड़ रुपये की लागत से विकसित स्नान घाट जनता को समर्पित किया गया। कार्यक्रम के दौरान मां यमुना कृष्ण मंदिर का शिलान्यास भी किया गया।
170 मीटर लंबा और 15 मीटर चौड़ा घाट
एमडीडीए द्वारा यमुना नदी के दायीं ओर विकसित स्नान घाट की लंबाई 170 मीटर और चौड़ाई 15 मीटर है। परियोजना में श्रद्धालुओं की सुविधा, सुरक्षा और तट के सौंदर्यीकरण पर विशेष ध्यान दिया गया है। नदी की ओर 170 मीटर लंबी और पांच मीटर ऊंची दो आरसीसी सुरक्षा दीवारें बनाई गई हैं। करीब 2000 वर्गमीटर क्षेत्र में आरसीसी और रेड सैंड स्टोन से दो प्लेटफॉर्म तैयार किए गए हैं। नदी तक सुरक्षित पहुंच के लिए सीढ़ियां तथा मां यमुना की आरती के लिए चार आरसीसी आरती स्थल बनाए गए हैं।
सोलर लाइट, बेंच और सुरक्षा की व्यवस्था
घाट पर रात के समय प्रकाश व्यवस्था के लिए 25 सोलर लाइटें लगाई गई हैं। इसके अलावा प्लांटर्स, शेड के साथ 12 बेंच, महिला एवं पुरुष श्रद्धालुओं के लिए शौचालय और चेंजिंग रूम की व्यवस्था की गई है। पेयजल के लिए वाटर स्पाउट लगाए गए हैं। नदी किनारे सुरक्षा के लिए करीब 300 मीटर लंबी एसएस रेलिंग और एसएस चेन भी स्थापित की गई है।
एमडीडीए सचिव मोहन सिंह बर्निया ने बताया कि हरिपुर कालसी का यमुना तट लंबे समय से धार्मिक आस्था का केंद्र रहा है। पहले यहां साप्ताहिक रूप से मां यमुना की आरती होती थी, लेकिन नए घाट के विकसित होने से अब प्रतिदिन आरती के आयोजन के लिए आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध हो गई हैं।
एमडीडीए उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी ने कहा कि घाट के विकास से हरिपुर कालसी के यमुना तट को व्यवस्थित और सुविधायुक्त स्वरूप मिला है। धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व वाले इस क्षेत्र में बेहतर आधारभूत सुविधाओं से श्रद्धालुओं के साथ पर्यटकों को भी लाभ मिलेगा तथा स्थानीय पर्यटन एवं सांस्कृतिक गतिविधियों को विस्तार मिलने की संभावना है।













