09 अक्टूबर 2026 ( सीमांत की आवाज )
पंतनगर में राज्य स्तरीय सम्मेलन आयोजित, 134 प्रतिनिधियों ने साझा की रणनीति; पीड़ितों के सुरक्षित बचाव और पुनर्वास पर जोर
पंतनगर (ऊधमसिंह नगर)। मानव तस्करी जैसे गंभीर एवं संगठित अपराध पर प्रभावी अंकुश लगाने, अंतरराज्यीय एवं अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क का पर्दाफाश करने तथा पीड़ितों के सुरक्षित बचाव और पुनर्वास को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से उत्तराखंड पुलिस की ओर से पंतनगर स्थित गांधी हॉल ऑडिटोरियम में राज्य स्तरीय मानव तस्करी सम्मेलन आयोजित किया गया। गृह मंत्रालय, भारत सरकार के दिशा-निर्देशों के क्रम में आयोजित इस सम्मेलन में उत्तराखंड सहित पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, बिहार और उत्तर प्रदेश के पुलिस अधिकारियों समेत विभिन्न केंद्रीय एजेंसियों, केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों, सरकारी विभागों, अभियोजन अधिकारियों, गैर-सरकारी संगठनों एवं बाल कल्याण समितियों के कुल 134 प्रतिनिधियों ने प्रतिभाग किया। सम्मेलन में मानव तस्करी के नेटवर्क की पहचान, अपराधियों के विरुद्ध प्रभावी कानूनी कार्रवाई, साक्ष्य आधारित विवेचना और पीड़ितों के संरक्षण एवं पुनर्वास को लेकर व्यापक मंथन किया गया।
सम्मेलन का उद्घाटन अपर पुलिस महानिदेशक, अपराध एवं कानून व्यवस्था, उत्तराखंड वी. मुरुगेशन ने किया। उन्होंने कहा कि मानव तस्करी एक गंभीर और संगठित अपराध है, जिससे निपटने के लिए केवल पुलिस की कार्रवाई पर्याप्त नहीं है, बल्कि सभी संबंधित विभागों, केंद्रीय एजेंसियों और सामाजिक संगठनों के बीच मजबूत समन्वय आवश्यक है। उन्होंने सीमावर्ती क्षेत्रों में सतर्कता बढ़ाने, कानूनी प्रावधानों का प्रभावी क्रियान्वयन करने तथा मानव तस्करी के पीड़ितों के सुरक्षित पुनर्वास को प्राथमिकता देने पर जोर दिया।
छह राज्यों के प्रतिनिधियों ने साझा किए अनुभव
सम्मेलन में छह राज्यों के प्रतिनिधियों ने मानव तस्करी की रोकथाम से संबंधित अपने अनुभव, चुनौतियां और प्रभावी कार्रवाई के तरीकों को साझा किया। प्रतिभागियों में उत्तराखंड पुलिस के 21 राजपत्रित अधिकारी और 73 अराजपत्रित अधिकारी शामिल रहे। इसके अतिरिक्त अन्य राज्यों के छह पुलिस अधिकारियों, केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों एवं केंद्रीय एजेंसियों के चार राजपत्रित अधिकारियों, केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों के आठ कार्मिकों, सिविल प्रशासन, अभियोजन, श्रम एवं बाल कल्याण विभागों के 14 अधिकारियों तथा गैर-सरकारी संगठनों और बाल कल्याण समितियों के आठ प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
सम्मेलन में मानव तस्करी के बदलते स्वरूप, अपराधियों द्वारा अपनाए जा रहे नए तौर-तरीकों तथा अंतरराज्यीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय नेटवर्क की पहचान करने पर विशेष चर्चा हुई। वक्ताओं ने कहा कि मानव तस्करी के मामलों में केवल आरोपियों की गिरफ्तारी तक सीमित रहने के बजाय पूरे नेटवर्क, उसके संचालन के तरीकों और उससे जुड़े अन्य लोगों की पहचान कर उनके विरुद्ध समन्वित कार्रवाई करना जरूरी है।
विशेषज्ञों ने दिए प्रभावी कार्रवाई के सुझाव
सम्मेलन में सेवानिवृत्त पुलिस महानिदेशक, एनडीआरएफ एवं टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज (टीआईएसएस) से जुड़े विशेषज्ञ पी.एम. नायर, एसडब्ल्यूआरसी बनबसा के संस्थापक एवं सचिव जनक बहादुर चन्द, मदद फाउंडेशन के संस्थापक एवं बाल संरक्षण विशेषज्ञ राजेश मणि, जस्ट राइट फॉर चिल्ड्रन के राष्ट्रीय संयोजक एवं शक्ति वाहिनी के संस्थापक रविकान्त, संयुक्त निदेशक (विधि) जी.सी. पंचोली तथा सहायक अभियोजन अधिकारी अपर्णा अवस्थी सहित अन्य विशेषज्ञों ने अपने विचार रखे।
विशेषज्ञों ने मानव तस्करी के मामलों में आधुनिक विवेचना तकनीकों के उपयोग, इलेक्ट्रॉनिक एवं अन्य साक्ष्यों के व्यवस्थित संकलन, प्रभावी अभियोजन और पीड़ितों की समयबद्ध पहचान को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि पीड़ितों को सुरक्षित बचाने के बाद उनके संरक्षण, कानूनी सहायता और पुनर्वास की प्रक्रिया को भी मजबूत बनाया जाना चाहिए, ताकि वे दोबारा शोषण का शिकार न हों और सामान्य जीवन की ओर लौट सकें।
अंतरराज्यीय नेटवर्क पर कार्रवाई के लिए बेहतर समन्वय जरूरी
सम्मेलन में विभिन्न राज्यों की पुलिस, केंद्रीय एजेंसियों और संबंधित विभागों के बीच सूचनाओं के त्वरित आदान-प्रदान पर जोर दिया गया। वक्ताओं ने कहा कि मानव तस्करी के संगठित नेटवर्क कई राज्यों में सक्रिय हो सकते हैं, ऐसे में किसी एक स्थान पर की गई कार्रवाई के साथ दूसरे राज्यों की संबंधित इकाइयों का सहयोग भी जरूरी है।
संदिग्ध गतिविधियों की समय रहते पहचान, तकनीकी साक्ष्यों का उपयोग, आरोपियों की कार्यप्रणाली का विश्लेषण और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर कानूनी कार्रवाई को प्रभावी बनाने पर चर्चा की गई। साथ ही अंतरराष्ट्रीय सीमाओं से जुड़े क्षेत्रों में सतर्कता बढ़ाने और संबंधित एजेंसियों के बीच सहयोग को मजबूत करने की आवश्यकता भी रेखांकित की गई।
पीड़ितों के सुरक्षित बचाव और पुनर्वास को प्राथमिकता
सम्मेलन में मानव तस्करी के विरुद्ध कार्रवाई के दौरान पीड़ित-केंद्रित दृष्टिकोण अपनाने पर विशेष बल दिया गया। वक्ताओं ने कहा कि पीड़ितों को सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराना, उनकी गरिमा एवं निजता की रक्षा करना और उनकी जरूरतों के अनुसार कानूनी एवं सामाजिक सहायता प्रदान करना उतना ही महत्वपूर्ण है, जितना अपराधियों के विरुद्ध कार्रवाई करना।
विशेष रूप से बच्चों और अन्य संवेदनशील वर्गों की समयबद्ध पहचान, सुरक्षित बचाव तथा आवश्यकतानुसार बाल कल्याण समिति और सक्षम प्राधिकरणों के समक्ष प्रस्तुत करने की प्रक्रिया पर चर्चा हुई। पुलिस, बाल कल्याण संस्थाओं, सरकारी विभागों और गैर-सरकारी संगठनों के बीच समन्वय स्थापित कर पीड़ितों के दीर्घकालिक पुनर्वास को प्रभावी बनाने पर जोर दिया गया।
साक्ष्य आधारित विवेचना और प्रभावी अभियोजन पर मंथन
मानव तस्करी के मामलों में दोषियों को कानून के दायरे में लाने के लिए साक्ष्यों का व्यवस्थित संकलन, वैज्ञानिक विवेचना और पुलिस एवं अभियोजन के बीच बेहतर तालमेल को आवश्यक बताया गया। सम्मेलन में विवेचना की गुणवत्ता बढ़ाने, इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों का समुचित उपयोग करने और कानूनी प्रक्रिया का प्रभावी अनुपालन सुनिश्चित करने से जुड़े व्यावहारिक पहलुओं पर विचार-विमर्श किया गया।
वक्ताओं ने कहा कि संवेदनशील मामलों में समय पर कार्रवाई और विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय से पीड़ितों को सुरक्षित बचाने के साथ ही अपराधियों के विरुद्ध मजबूत कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जा सकती है।
हरिद्वार पुलिस ने साझा किए दो महत्वपूर्ण मामले
सम्मेलन में हरिद्वार जनपद पुलिस ने दो महत्वपूर्ण मामलों की केस स्टडी प्रस्तुत की। पहले मामले में 13 वर्षीय अपहृत बालिका को बिहार से सकुशल बरामद किया गया और मामले में पांच अभियुक्तों को गिरफ्तार किया गया। दूसरे मामले में अपहृत चार माह के शिशु को सुरक्षित बरामद करने की कार्रवाई की जानकारी साझा की गई।
इन दोनों मामलों में इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों, त्वरित जांच और अंतरराज्यीय पुलिस समन्वय की महत्वपूर्ण भूमिका रही। इन उदाहरणों के माध्यम से बताया गया कि संवेदनशील मामलों में शुरुआती घंटों के दौरान सक्रियता, वैज्ञानिक विवेचना और विभिन्न पुलिस इकाइयों के बीच प्रभावी तालमेल पीड़ितों की सुरक्षित बरामदगी में निर्णायक साबित हो सकता है।
उत्कृष्ट कार्य करने वाले 11 पुलिसकर्मी सम्मानित
सम्मेलन के समापन सत्र में मानव तस्करी की रोकथाम, पीड़ितों के बचाव और संबंधित मामलों में प्रभावी कार्रवाई के लिए उत्कृष्ट कार्य करने वाले 11 पुलिसकर्मियों को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया।
पंतनगर में आयोजित यह सम्मेलन मानव तस्करी के विरुद्ध विभिन्न राज्यों की पुलिस, केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों, सरकारी विभागों और गैर-सरकारी संगठनों के बीच सहयोग बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल रहा। सम्मेलन के माध्यम से अपराधियों के नेटवर्क पर प्रभावी कार्रवाई, पीड़ितों के सुरक्षित बचाव, संरक्षण एवं पुनर्वास तथा दोषियों को सजा दिलाने के लिए समन्वित प्रयासों को और मजबूत करने का संदेश दिया गया।













