3 नवंबर 2025 सीमांत की आवाज
सरकार के महिला सशक्तिकरण के प्रयासों को पंख लगा गईं राष्ट्रपति
स्वर्गीय गौरा देवी से लेकर वंदना कटारिया तक के नामों का उल्लेख
देहरादून, 03 नवम्बर 2025 (सू. ब्यूरो)
उत्तराखंड विधानसभा के विशेष सत्र में सोमवार को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु की मौजूदगी के बीच माहौल में उल्लास और गर्व का वातावरण दिखाई दिया। राज्य की स्थापना की रजत जयंती समारोह का यह अवसर और भी खास बन गया, क्योंकि एक दिन पूर्व ही भारतीय महिला क्रिकेट टीम विश्व विजेता बनी थी। इन दोहरी खुशियों के बीच राष्ट्रपति के अभिभाषण ने नारी सशक्तिकरण की दिशा में राज्य के प्रयासों को नई ऊंचाई दी।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने अपने संबोधन में उत्तराखंड में महिला शिक्षा के विस्तार, मातृ-शिशु मृत्यु दर में कमी और महिलाओं की सामाजिक-आर्थिक भागीदारी बढ़ाने के प्रयासों की खुलकर सराहना की। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड ने महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य किए हैं।
राष्ट्रपति ने स्वर्गीय गौरा देवी, राज्य आंदोलन की अग्रणी सुशीला बलूनी, पर्वतारोही बछेंद्री पाल, सामाजिक कार्यकर्ता राधा भट्ट और अंतरराष्ट्रीय हॉकी खिलाड़ी वंदना कटारिया जैसी विभूतियों का उल्लेख करते हुए कहा कि उत्तराखंड की बेटियों ने हमेशा राज्य और देश का नाम रोशन किया है। उन्होंने विधानसभा की पहली महिला अध्यक्ष ऋतु खंडूरी भूषण की नियुक्ति को गौरवशाली उपलब्धि बताते हुए विधानसभा में महिला सदस्यों की संख्या में और वृद्धि की अपेक्षा भी व्यक्त की।
सीएम द्वारा महिला क्रिकेट टीम का उल्लेख, राष्ट्रपति ने बजाई तालियां
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपने संबोधन की शुरुआत भारतीय महिला क्रिकेट टीम के विश्व विजेता बनने की उपलब्धि से की। उन्होंने बेटियों को बधाई दी, तो राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने भी उत्साहपूर्वक तालियां बजाकर अपनी खुशी व्यक्त की। पूरा सदन तालियों की गूंज से गूंज उठा।
अभिभाषण में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) की चर्चा
अपने अभिभाषण के दौरान राष्ट्रपति ने समान नागरिक संहिता (यूसीसी) का भी विशेष रूप से उल्लेख किया। उन्होंने संविधान के अनुच्छेद-44 का हवाला देते हुए कहा कि समानता और एकरूपता की भावना को सशक्त बनाने के लिए यूसीसी का क्रियान्वयन एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने इस दिशा में कार्य करने वाले राज्य सरकार और विधानसभा सदस्यों की सराहना की।
राष्ट्रपति के अभिभाषण ने न केवल राज्य की उपलब्धियों को रेखांकित किया, बल्कि महिला सशक्तिकरण और समानता के मूल्यों को भी नई प्रेरणा प्रदान की।








