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बिग न्यूज संत समाज ने मुख्यमंत्री धामी को दिया ‘देवभूमि के धर्म-संरक्षक’ का आशीर्वाद रजत जयंती वर्ष में आध्यात्मिक संगम — देशभर के संतों ने की धामी सरकार की सांस्कृतिक दृष्टि की सराहना

5 नवंबर 2025 सीमांत की आवाज 

देहरादून। उत्तराखंड की रजत जयंती वर्ष के अवसर पर मुख्यमंत्री आवास आज आध्यात्मिकता और सांस्कृतिक सौहार्द का केंद्र बन गया, जब देशभर के प्रतिष्ठित संतों, महात्माओं और धर्माचार्यों ने मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी से भेंट कर राज्य की प्रगति, सांस्कृतिक संरक्षण तथा अध्यात्मिक समृद्धि के प्रति उनके प्रयासों की सराहना की।

संत समाज ने मुख्यमंत्री धामी को आशीर्वाद देते हुए उन्हें “देवभूमि का धर्म-संरक्षक” बताया। संतों ने कहा कि मुख्यमंत्री धामी के नेतृत्व में उत्तराखंड आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और विकास के नए आयाम स्थापित कर रहा है।

मुख्यमंत्री आवास में आयोजित इस “आध्यात्मिक संगम” में आचार्य महामंडलेश्वर कैलाशानंद गिरी जी महाराज, जूनापीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरि जी, परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष पूज्य स्वामी चिदानंद सरस्वती जी, अखाड़ा परिषद अध्यक्ष स्वामी रविंद्रपुरी महाराज, बागेश्वर धाम पीठाधीश्वर पं. धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री, पतंजलि योगपीठ के आचार्य बालकृष्ण, प्रसिद्ध वक्ता जया किशोरी, चिंतक डॉ. कुमार विश्वास सहित अनेक संत-महात्मा उपस्थित रहे।

सभी संतों ने मुख्यमंत्री को रजत जयंती वर्ष की शुभकामनाएँ दीं और राज्य में हो रहे सांस्कृतिक पुनरुत्थान की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि “मुख्यमंत्री धामी ने देवभूमि की आत्मा — उसकी संस्कृति, परंपरा और सामाजिक समरसता — को सशक्त नेतृत्व प्रदान किया है।”

संत समाज ने सरकार की उन योजनाओं की भी सराहना की, जिनसे धार्मिक स्थलों का विकास, आध्यात्मिक पर्यटन को प्रोत्साहन, और परंपराओं का संरक्षण सशक्त हुआ है।

कुम्भ-2027 को लेकर एकजुट हुआ संत समाज
संतों ने मुख्यमंत्री को आशीर्वाद देते हुए कहा कि “हरिद्वार कुम्भ-2027 को भव्य, दिव्य और विश्व-स्तरीय आयोजन के रूप में स्थापित करने के लिए संत समाज और सरकार कंधे से कंधा मिलाकर कार्य करेंगे।” उन्होंने कहा कि कुम्भ केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति और वैश्विक आध्यात्मिक चेतना का महासंगम है।

संत समाज ने कहा कि सरकार द्वारा यातायात, अधोसंरचना, घाटों के सौंदर्यीकरण, स्वच्छता और तीर्थ विकास के क्षेत्र में जो प्रयास किए जा रहे हैं, वे सराहनीय हैं और हरिद्वार को विश्व आध्यात्मिक धरोहर केंद्र के रूप में प्रतिष्ठित करेंगे।

“कुम्भ-2027 इतिहास में स्वर्णिम अध्याय लिखेगा”
संतों ने कहा कि मुख्यमंत्री धामी की दूरदृष्टि और पारदर्शी कार्यशैली से उत्तराखंड का कुम्भ आयोजन ऐतिहासिक होगा। “हम सभी अखाड़े और धर्म संस्थान एक परिवार की तरह कुम्भ की सफलता के लिए मिलकर कार्य करेंगे,” उन्होंने आश्वस्त किया।

सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विकास का केंद्र बनता उत्तराखंड
संत समाज ने कहा कि उत्तराखंड आज वैश्विक स्तर पर एक “आध्यात्मिक शांति केंद्र” के रूप में उभर रहा है, जिसका श्रेय राज्य सरकार की सांस्कृतिक दृष्टि और नेतृत्व को जाता है।
कार्यक्रम के अंत में संतों ने प्रदेशवासियों के लिए मंगलकामनाएँ व्यक्त कीं और मुख्यमंत्री को रजत जयंती वर्ष को ऐतिहासिक रूप से “आध्यात्मिक युग का उत्सव” बनाने के लिए आशीर्वाद दिया।

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