02 मार्च 2026 ( सीमांत की आवाज ) बाराबंकी, उत्तर प्रदेश।
बाराबंकी की सिरौली गौसपुर तहसील स्थित किंतूर गांव अचानक चर्चा में आ गया है। बताया जा रहा है कि अली खामेनेई के दादा सैयद अहमद मुसावी ‘हिंदी’ 18वीं-19वीं सदी के दौरान इसी गांव में निवास करते थे। परिवार ने अपनी भारतीय जड़ों की पहचान बनाए रखने के लिए अपने नाम के साथ ‘हिंदी’ उपनाम जोड़ा था।
गांव के बुजुर्गों के अनुसार, यहां आज भी कुछ पुराने दस्तावेज और पुश्तैनी मकानों की यादें मौजूद हैं, जो इस ऐतिहासिक संबंध की ओर इशारा करती हैं।
जैसे ही सोशल मीडिया और टीवी चैनलों के जरिए हमले और मौत की खबर गांव पहुंची, माहौल अचानक बदल गया। लोग अपने-अपने घरों में बैठकर समाचार देखने लगे और गांव में सन्नाटा छा गया।
स्थानीय निवासी सैय्यद निहाल मियां ने नम आंखों से कहा, “यह सिर्फ ईरान का नहीं, बल्कि पूरी दुनिया का नुकसान है।” उनके मुताबिक, खामेनेई को लोग एक बड़े धार्मिक और राजनीतिक नेता के रूप में जानते थे।
डॉ. रेहान काजमी ने भी गहरा दुख व्यक्त करते हुए इसे “बहुत बड़ी क्षति” बताया। गांव के कई लोग इसे “इतिहास का दर्दनाक पल” करार दे रहे हैं और आपस में बैठकर पुराने रिश्तों व इस ऐतिहासिक जुड़ाव की चर्चा कर रहे हैं।
किंतूर गांव में इस खबर के बाद भावनात्मक माहौल बना हुआ है।







